प्यारी माँ
प्यारी माँ, Thankyou.
सच कहूँ तो, बड़ा ही अजीब लग रहा है, तुम्हे पहले ऐसे thank you कहाँ नही ना, शायद इसलिए. या फिर इसलिए, की तुम्हे किस किस बात के लिए thank you कहूँ? मुझे तो साँसे ही तुमने दी हैं. पर फिर भी, आज ऐसा मन कर रहा है .
"तुम्हे याद होगा माँ, जब मैं बोकारो से वापस गया आया था, २ साल के बाद. मैं बोकारो अपनी +२ की पढ़ाई करने के लिए गया था. आर्थिक तंगी के बावजूद तुमलोगो ने मुझे बाहर भेजा था, की मै IIT की तैयारी कर सकूँ. यह अलग बात है की IIT तो क्या, मैं हर एक इंजीनियरिंग कम्पटीशन में बुरी तरह नाकाम रहा. और तो और 12th बोर्ड में भी कोई खास नंबर नही आए मेरे. तो लौट के बुद्धू घर आ गया था, वापस.
फिर मुझे पता चला कि मेरे ज़्यादातर दोस्त दिल्ली जा रहे हैं , दिल्ली में कोचिंग में दाखिला लेकर IIT की तैयारी करने. सबने FIITJEE में अड्मिशन ले लिया था. हमेशा की तरह मैं देर से जागा. पर जब में जागा, और घर में बताया की मैं भी दिल्ली जाना चाहता हूँ, घर में कोई तैयार नही हुआ मुझे दिल्ली भेजने को. पैसे की तंगी तो थी है, पर असली वजह शायद यह थी की मुझपे विश्वास नही बचा था किसी का. क्या हो जाएगा दिल्ली जाके ? बोकारो भेजा तो था, क्या ही हो गया? शायद यही सोचा हो सबने.
.
और यह ग़लत भी नही था. मुझे खुद भी ऐसा ही लग रहा था. की शायद में IIT के लिए बना ही नही हूँ. पर मैं रेस में बना रहना चाहता था. या फिर शायद बाकी दोस्तो को दिल्ली जाते देख ' कुछ छूट जाने का डर' मुझपे हावी हो गया था. वजह चाहे जो भी रही हो, मैने ज़िद पकड़ ली, की मुझे दिल्ली जाना है. घर में तूफान खड़ा कर दिया . कहा , आपलोग नही भेजेंगे तो मैं खुद चला जाऊंगा, घर से भाग जाऊंगा. शायद जीवन में पहली बार मैने इस तरह किसी चीज़ की ज़िद की थी. बचपन से लेकर तब तक, मैं तुम्हारा होनहार, ना तंग करने वाला बेटा बना रहा था. पता नही तब मुझे क्या हो गया था की मैं इस तरह बग़ावत पे उतार आया था. तुम्हे भी शायद अजीब लगा हो?
.
पर पता नही क्यू मुझे ऐसा लगता है की तुम्हे अच्छा लगा होगा. कि तुम्हारा बेटा हार नही मानना चाहता, लड़ना चाहता है , अपने हक़ के लिए. या फिर तुम तड़प गयी होगी, मेरी बेचैनी देखकर. या फिर हमेशा की तरह , तुम्हारा विश्वास मुझपे अडिग रहा होगा. मुझे मौका नही मिले, ऐसे तुमने कभी होने नही दिया."
फिर तुमने , सब घरवालो से लड़के , मुझे दिल्ली भेजा. पता नही कहाँ से, तुमने मेरी कोचिंग में अड्मिशन के लिए पैसे जुटाए. तुमने क्या किया था माँ? अपने गहने गिरवी रखे थे? या फिर तुम्हारे पास छुपाये हुए रुपये थे. मुझे नही पता , और ना ही मुझे जानना है.
इतना जान लो, की तुम्हारा वो विश्वास, मुझे टॉनिक बनकर मिला. अगर मुझे आसानी से दिल्ली भेज दिया जाता , तो मैं शायद एक और साल बर्बाद करके वापस घर आ जाता. पर उपर लिखा जो सब हुआ, उसने मुझे बहुत शक्ति दी. मैने जी तोड़ मेहनत की. मैने कोचिंग बाकी लोगो से २ महीने बाद join की थी, पर मैने दिन रात एक करके पढ़ाई की. मेरे सारे दोस्त भी हैरान थे. जो लड़का, बोकारो में पढ़ाई से कोसो दूर भागता था, उसको क्या हो गया था?
मुझे भी नही पता क्या हो गया था. हर इंसान के जीवन में एक टर्निंग पॉइंट आता है. शायद यह मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट था. यह वो समय था जब मैने खुद को पहचाना. ऑल इंडिया IIT screening test में मेरी All India Rank 310 आयी. मैने सपने में भी नही सोचा था की मैं ऐसा कुछ कर पाऊंगा. मैं बोकारो में अपने होस्टेल का सबसे फिसड्डी छात्र रहा हुंगा, पर मेरी rank बाकी सबसे बहुत आगे थी.
पर तुम्हे ये thank you इसलिए नही कह रहा कि मैंने IIT निकाला. और ना ही उस बढ़िया rank के लिए. तुम्हे मेरा धन्यवाद उस विश्वास के लिए है जो तुमने मुझपे तब किया जब मेरा खुदपे ही विश्वास हिल रहा था. हारे हुए का विश्वास तो शायद कोई फिर भी कर ले, पर उसका कोई विश्वास कैसे करे, जो खेला ही नही हो. तुमने मुझपे तब भी विश्वास किया, जब मैं खेला ही नही.
मैं ये भी जानता हूँ कि उस विश्वास के लिए Thank You तो बहुत ही तुच्छ शब्द है. अभी जब मैं यह लिख रहा हूँ, मेरी आँखे तुम्हारे प्रति मेरे स्नेह से ओत प्रोत हैं. तुम मेरी माँ हो इसका मुझे अपरिमित गर्व, आनंद और कृतज्ञता है.
तुम्हारा
गुट्टू
सच कहूँ तो, बड़ा ही अजीब लग रहा है, तुम्हे पहले ऐसे thank you कहाँ नही ना, शायद इसलिए. या फिर इसलिए, की तुम्हे किस किस बात के लिए thank you कहूँ? मुझे तो साँसे ही तुमने दी हैं. पर फिर भी, आज ऐसा मन कर रहा है .
"तुम्हे याद होगा माँ, जब मैं बोकारो से वापस गया आया था, २ साल के बाद. मैं बोकारो अपनी +२ की पढ़ाई करने के लिए गया था. आर्थिक तंगी के बावजूद तुमलोगो ने मुझे बाहर भेजा था, की मै IIT की तैयारी कर सकूँ. यह अलग बात है की IIT तो क्या, मैं हर एक इंजीनियरिंग कम्पटीशन में बुरी तरह नाकाम रहा. और तो और 12th बोर्ड में भी कोई खास नंबर नही आए मेरे. तो लौट के बुद्धू घर आ गया था, वापस.
फिर मुझे पता चला कि मेरे ज़्यादातर दोस्त दिल्ली जा रहे हैं , दिल्ली में कोचिंग में दाखिला लेकर IIT की तैयारी करने. सबने FIITJEE में अड्मिशन ले लिया था. हमेशा की तरह मैं देर से जागा. पर जब में जागा, और घर में बताया की मैं भी दिल्ली जाना चाहता हूँ, घर में कोई तैयार नही हुआ मुझे दिल्ली भेजने को. पैसे की तंगी तो थी है, पर असली वजह शायद यह थी की मुझपे विश्वास नही बचा था किसी का. क्या हो जाएगा दिल्ली जाके ? बोकारो भेजा तो था, क्या ही हो गया? शायद यही सोचा हो सबने.
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और यह ग़लत भी नही था. मुझे खुद भी ऐसा ही लग रहा था. की शायद में IIT के लिए बना ही नही हूँ. पर मैं रेस में बना रहना चाहता था. या फिर शायद बाकी दोस्तो को दिल्ली जाते देख ' कुछ छूट जाने का डर' मुझपे हावी हो गया था. वजह चाहे जो भी रही हो, मैने ज़िद पकड़ ली, की मुझे दिल्ली जाना है. घर में तूफान खड़ा कर दिया . कहा , आपलोग नही भेजेंगे तो मैं खुद चला जाऊंगा, घर से भाग जाऊंगा. शायद जीवन में पहली बार मैने इस तरह किसी चीज़ की ज़िद की थी. बचपन से लेकर तब तक, मैं तुम्हारा होनहार, ना तंग करने वाला बेटा बना रहा था. पता नही तब मुझे क्या हो गया था की मैं इस तरह बग़ावत पे उतार आया था. तुम्हे भी शायद अजीब लगा हो?
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पर पता नही क्यू मुझे ऐसा लगता है की तुम्हे अच्छा लगा होगा. कि तुम्हारा बेटा हार नही मानना चाहता, लड़ना चाहता है , अपने हक़ के लिए. या फिर तुम तड़प गयी होगी, मेरी बेचैनी देखकर. या फिर हमेशा की तरह , तुम्हारा विश्वास मुझपे अडिग रहा होगा. मुझे मौका नही मिले, ऐसे तुमने कभी होने नही दिया."
फिर तुमने , सब घरवालो से लड़के , मुझे दिल्ली भेजा. पता नही कहाँ से, तुमने मेरी कोचिंग में अड्मिशन के लिए पैसे जुटाए. तुमने क्या किया था माँ? अपने गहने गिरवी रखे थे? या फिर तुम्हारे पास छुपाये हुए रुपये थे. मुझे नही पता , और ना ही मुझे जानना है.
इतना जान लो, की तुम्हारा वो विश्वास, मुझे टॉनिक बनकर मिला. अगर मुझे आसानी से दिल्ली भेज दिया जाता , तो मैं शायद एक और साल बर्बाद करके वापस घर आ जाता. पर उपर लिखा जो सब हुआ, उसने मुझे बहुत शक्ति दी. मैने जी तोड़ मेहनत की. मैने कोचिंग बाकी लोगो से २ महीने बाद join की थी, पर मैने दिन रात एक करके पढ़ाई की. मेरे सारे दोस्त भी हैरान थे. जो लड़का, बोकारो में पढ़ाई से कोसो दूर भागता था, उसको क्या हो गया था?
मुझे भी नही पता क्या हो गया था. हर इंसान के जीवन में एक टर्निंग पॉइंट आता है. शायद यह मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट था. यह वो समय था जब मैने खुद को पहचाना. ऑल इंडिया IIT screening test में मेरी All India Rank 310 आयी. मैने सपने में भी नही सोचा था की मैं ऐसा कुछ कर पाऊंगा. मैं बोकारो में अपने होस्टेल का सबसे फिसड्डी छात्र रहा हुंगा, पर मेरी rank बाकी सबसे बहुत आगे थी.
पर तुम्हे ये thank you इसलिए नही कह रहा कि मैंने IIT निकाला. और ना ही उस बढ़िया rank के लिए. तुम्हे मेरा धन्यवाद उस विश्वास के लिए है जो तुमने मुझपे तब किया जब मेरा खुदपे ही विश्वास हिल रहा था. हारे हुए का विश्वास तो शायद कोई फिर भी कर ले, पर उसका कोई विश्वास कैसे करे, जो खेला ही नही हो. तुमने मुझपे तब भी विश्वास किया, जब मैं खेला ही नही.
मैं ये भी जानता हूँ कि उस विश्वास के लिए Thank You तो बहुत ही तुच्छ शब्द है. अभी जब मैं यह लिख रहा हूँ, मेरी आँखे तुम्हारे प्रति मेरे स्नेह से ओत प्रोत हैं. तुम मेरी माँ हो इसका मुझे अपरिमित गर्व, आनंद और कृतज्ञता है.
तुम्हारा
गुट्टू
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