बेटा जब तुम मुस्काती हो
तुम मेरे मन के आंगन में लगे हुए
हर इक पौधे को पानी दे जाती हो.
बेटा जब तुम मुस्काती हो
तुम ठंडी के मौसम में छत्त पर
ठिठुरे ठिठुरे से उत्साह को,
सूरज की गर्मी दे जाती हो
बेटा जब तुम मुस्काती हो
तुम ऑफिस से वापिस आये
थोड़े से झल्लाए हुए अहम् को
इक "सेवेंटीज का " गीत सुनाती हो
बेटा जब तुम मुस्काती हो
तुम सोकर बिलकुल उठे उठे
अलसाये से इस जीवन को
इक कड़क चाय पिलाती हो
बेटा जब तुम मुस्काती हो
तुम पढ़ी लिखी इस महाज्ञानी
दुनिया की बुद्धिमानी को
"टेक इट इजी " का पाठ पढ़ाती हो
बेटा जब तुम मुस्काती हो
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