फिर तुम आई


हम दो पहियों की गाडी थे
मस्ती में खूब अगाडी थे
फिर तुम आई

हम घूम रहे थे जग सारा
हम भूल रहे थे जग सारा
फिर तुम आई

हम दोनों खुद में पूरे थे
एक दूसरे संग समूचे थे
फिर तुम आई

तुमने फिर  बचपन बरसाया
मन बांछे भर भर हर्षाया
जब तुम आई

तुमने यूँ मौसम किया जादुई
धानी धानी हुई पुरवाई
जब तुम आई

तुम गीत मधुर , जो हमने गाया
तुम नृत्य हृदय का, 
जिसपे झूम मन भर आया
हमने फिर से खुद को पाया
जब तुम आई

आज हुए है साल दो , तुम्हारे आने को
है कृतग्य हम उस क्षण के लिए,
जिस क्षण हमारे जीवन में
धानी बिटिया, तुम आई














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